Motu patlu ki kahani – Motu Aur Patlu Comics named Motu Patlu Aur Junk Kagaz created by Pitara Comic. This comic is in Hindi language.
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Motu Patlu Ki Kahani

ओय काकरोच कुछ सुना आजकल शहर
में किस बात के चर्चे हैं।
तो जरा अपने कानों में तेल डालकर सुन,
कागज के दाम एकदम से बढ़ गये हैं।
तो इसमें इतना उछलने की क्या बात है,
तेरी कौन सी कागज की मिलें लगी हुई है।
तू रहा बुद्ध का बुद्ध,अबे आवंले के
आचार यदि कागज के भाव बढ़ेगें तो क्या
रद्दीभीमहंगी नहीं होजायेगी
पर हमारे घर तो थोड़ी सी अखबारें हैं,
ज्यादा से ज्यादा एक आध रूपया ज्यादा.
मिल जायेगा..और क्या!
गरर, बेवकुफ ..गधे.क्यों न हम भी रद्दी
इक्टठी करे..फिर बुन्दे कबाड़िये को
बेचे….सोच कितना मुनाफा होगा।
ही..हिंग लगे न फिटकरी रंग चोखा का
चोखा
अब आया नलाईन पर..
कौन आ गया रेलवे लाईन पर.. बच गया
या बोलोराम हो गया।
आ मर नासपीटे कछुये..तू लोगों के बोलो
राम की ही सोचता रहता है या कोई काम
धाम भी करता है।
मुझे दुनिया के हर एक काम का बीस साल
का तजुर्बा है, बोलो क्या काम करके
दिखाऊी
हमारे साथ मिलकर बोरे उठा और गली हे हे हे..महाराज जी..यह काम तो मैं शुरू कर भी चुका हूँ।
गली घूम कर रद्दी कागज इक्ट्ठे कर और मेरा बोरा बाहर ही पड़ा है.मैं तो तुम्हारे से भी रद्दी
खरीद,
खरीदने ही आया था।
बोल
करेगा।
तो तूने भी कागज के भाव बढ़ने वाली
खबर सुनहीली।
हे हे हे….बादशाहो..सानूं ऐवें दियां खबर
शबरा..सुनण दावी.साल दा तजुर्बा
हैगा..समझे।
तो चलो फिर अपना नया काम शुरू करते है।
जल्दी ही तीनों निकल पड़े।
पुरानी रद्दी दो..कागज कापी..दो.
अरे वो देखो उस घर में कागज़ ही कामज
चलो आओखरीद लेते हैं।
सभी फटाफट उस मकान के पास जा
पहुँचे,एक व्यक्ति अंदर से निकला
कहिये…..क्या काम है?
आपके आंगन में ढ़ेर सारे पुराने रद्दी कागज
पड़े हुये हैं…
वह हमें उठा लेने दीजिए.आपकी सफाई
भी हो जायेगी और हमारा काम भी बन
जायेगा।
अच्छा जी..चलो दोस्तो हो..जाओशुला
ठीक है..मगर ध्यान रहे सिर्फ आर्गन से ही
उठाना कहीं घर के अंदर न घुसजाना।
होगयें शुरू..
लगता है उन्हें बाहर फेंकना भूल गये है।
तभी घसीटे की निगाह खिड़की के अन्दर
पड़ी
अरे वो देखो ऑन से ज्यादा कागज
तोम
अन्दर मेजों पर पड़े है।
तो आ जाओ फिर..फटाफट इक्ठे कर
लेते है।
तीनों खिड़की से अन्दर कूद गये और जो
कागजमिला बोरे में भरने लगे
यहदेखो..दराज पूरीभरी पड़ी है..पहले पता
होता तो एक दो खाली बोरियां और ले आते
जल्दी ही-
लो अब फटाफट बुन्दे कव्याड़िये को
बेच आयें।
और नये नये नोट कमायें।
फिर मिल कर रसमलाई खायें।
Motu Patlu Ki Kahani
अभी थोड़ी दूर ही गये थे कि
हम्फ..हम्फ.क्या तुम तीनों वही हो न जो
मेरे घर से रद्दी कागज उठा के लाये हैं।
अरे रूकना ….
हां जी..क्यों क्या बात है?
बात के बापू ..तुम लोगो ने मेरे दफ्तर के
सारे कागज भी उठा लिये..
जो मैं घर
में पूरे करने के लिएलाया था।
फटाफट निकालो..वापिस करो
वो..तो
पता नहीं किस बोरे में दबे पड़े हैं।
तभी तो मैं यह डण्डा साधलाया हूँ..अब
फटाफट मेरेवो.
कागज ढूंढदोवरना
यह डण्डा तुम सब का हाल इन रद्दी
कागजों जैसा बना देगा..समझे
फिरतो हालत-ए-नजारा यह था
बू हू हू..अब लगे रहो..एक एक कागज
को देख कर दूंढना पड़ेगा. न जाने कितना
समय लग जायेगा।
समय तो बेटा तभी से खराब आ गया था।
जब यह महालीचड़ हमारे संग लगा था।
मुझे कोसने से क्या मिलेगा …चुप कर
कागज दूढ़ते रहो..वरना यह आदमी हमारा
बंटाधार कर देगा..बू हू हू
पतलाकसमा
यार ..मोटू..परसों रात मैंने सपने में देखा मैं
एक बाड़े सुन्दर से
रहा हूँ
बगीचे में घूम
अच्छा
और पता है कल सुबह घूमने गया तो ठीक
वैसा ही बगीचा मिस्टर वर्मा की कोठी में
बना हुआ था।
वाह!
मगर कल रात मुझे फिर सपना
आया!
कल रात मैंने देखा मैंने एक कदम आगे बढ़ाया तो एक
कि बगीचे में चारो कांटा मेरे पांव में चुभ गया तभी
ओर कांटे ही कांटे मेरी नीदं खुल गई.
पड़े है।
क्या- ?
ओह ! तुम ऐसा करना आज दोनों पावों में
जूते पहन कर सोना जिससे तुम अगर अपने
कदम आगे बढ़ाओ तो और कांटे तो न
चुभे।
अयं?
कथानक-रजत राजवंशी
चित्राकन-हरविन्द्रमाकंड़
चार
मायापर्व में मोरियां बहुत बढ़ गई थी, एक
रोन्न अखबार में चोरियों के बारे में पढ़ कर
मोदल्यातल को लगा कि चोर किसी दिन
उनक घरमीमा सकता ही
हमें कुछ न कुछ करना होगा मोटे यमदूत।
ठीक कहता है तू पतीले,वरना किसी दिन
चोर हमारे यहाँ आ गया तो…
..है..है..है..आ गया क्या ? आ ही गया हूँ।
और इस वीं में पकड़े जाने के चांस भी
कम है..हे..हे. हे
Motu Patlu Ki Kahani
हमें चोर से मुकाबले के लिए तैयार रहना
चाहिए।
मैं तो तैयार हूँ। पिछली होली पर गलती से
मैंने यह पिस्तौल खरीद ली थी, यह किस
समय काम आयेगी।
…मैं दिल का कमजोर जरूर हूँ..मगर होली
वाली पिस्तौल से नहीं डरने वाला।
चल अब सो जाते है. मुझे तो नीद आ रही
है।
आ..(उबासी) चल फिर..!
जल्दी ही कमरा दोनों के खरटिों से गूंजने
लगा।
Motu Patlu Ki Kahani
लोजी वह तो सो गये पर यह चोर महाशय
तो अब हरकत में आये है।
हे हे हे मुझे इसी का इंतजार था।
अरे पतलू..तूने अभी कोई आवाज सुनी?
हो..सुनी तो है
लगता है। कोई चोर आ गया है। अपने यहाँ
चो…र….बू हू हू हू हू..मुझे तो डर लग रहा
है।
Motu Patlu Ki Kahani
चोर जी अपने काम में मस्त हैं।
अगर कोई जाग जाये तो कहदो तुम्हारे घर
में कोई चोर घुसा है मैं उसी को पकड़ने के
लिये अंदर कूदा हूँहे हे हे
-पुलिस की वर्दी पहनकर चोरी करने के
भी कई फायदे हैं।
इनको यहाँ अपना काम करने देते हैं, और
जरा.एक नजर अपने मास्टर घसीटा राम
की तरफ मारते हैं।
बू हू हू हू..कहीं चोर मेरे घर न आ जाये
कहीं मेरे फटे पुराने कपड़े न चुरा ले
अपने यारों मोटू पतलू के घर
चलकर किसी एक को साध ले आता हूँ
फिर डर नहीं लगेगा।
जाये..बू हुहुहू…
सनक आखिर सनक है और डर आखिर
डर है। घसीटा राम को डर लगा तो मोटू
पतलू के यहाँ जाने की सनक में अपना घर
उभर
उधर किचन में कोई है..
तभी चोर ने भी आहट सुनी
द..दे.देखते है..
बापरे कोई आ रहा है. इधर.क..कहाँ छिपू?
इस आटे के ड्रम के पीछे छिपना ठीक
रहेगी।
दोनो अन्दर घुसे…,
यहाँ तो कोई नहीं दिख रहा पर कोई धा तो जरूर
Motu Patlu Ki Kahani
इधार कोई आहट हुई थी!
कही आटे के ड्रम में तो नहीं है?
दोनो ड्रम में झांकने के लिए झुकेतभी..
देखें!
…चोर ने ड्रम को उन्ही पर उलटा दिया
भाग लू|
Motu Patlu Ki Kahani
मोटू पतलू आटे से सना चेहरा साफ करके
कुछ देख पाते, : उससे पहले ही चोर जी
महाराज किचन से निकल भागे।
रूक जाओ..वरना गोली मार दूंगा।
हे..हे..हे..होली कीपिस्तौलसे
गोली मारोगे
.मारो.मारो..
हड़बड़ाहट में मोटू ने ट्रेगर दबा ही दिया
धीय
हाय
गोली की आवाज सुनते ही नाजुक दिल के
चोर महाशय चक्रघिनी खाकर गिर पड़े
मगर गिरे सीधे
Motu Patlu Ki Kahani
घसीटा राग के ऊपर!
होली में गलती से दीवाली वाली पिस्तौल
की खरीद का कोई फायदा हुआ या
नहीं..आओदेखे।
गनीमत है गोली नहीं लगी
भागही लूँ..
-अब तो
तभी मोटू जोर जोर से चिल्लाया
चोर..चोर
चोर..चोर..
‘चोर?
मोटू की आवाज वहाँ से गुजरतें हवलदार टिण्डा मल ने सुनी।
Motu Patlu Ki Kahani
घसीटा राग के ऊपर!
होली में गलती से दीवाली वाली पिस्तौल
की खरीद का कोई फायदा हुआ या
नहीं..आओदेखे।
गनीमत है गोली नहीं लगी
भागही लूँ..
-अब तो
तभी मोटू जोर जोर से चिल्लाया
चोर..चोर
चोर..चोर..
‘चोर?
मोटू की आवाज वहाँ से गुजरतें हवलदार टिण्डा मल ने सुनी।
Motu Patlu Ki Kahani
किधर है चोर कहां है चोर
यह रहा ..तुम इसे पकड़ो..दूसरा भाग गया
मैं उसे पकड़ता हूँ।
लीजिए पाठक गणो,असली चोर तो भाग
गया..मोटू पतलू और हवलदार कीआवाजें
सुनकर आनन-फानन में लोग भागे भागे
आये।
चार
चोर।
…मैं कहांहूँ..
बड़ी मुश्किल से हाथ आया है। बाहर बड़ा शोर है..चल आ देखें तो सही
उस चोर को
मारो इसे..
चलो
जब तक वो बाहर आते तब तक घसीटे
का फलूदा बन चुका था।
+
दिशुम यह ले
मत मारो मैं तो घसीटा हूं
फिर
Succes
Motu Patlu Ki Kahani
अरे छोड़ो इसे..यह तो सचमुच अपना
घसीटा है।
तो फिर चोर कहां गया?
वह है–
सब कुछ ले जाऊंगा ..हे हे हे
जिस समय मोटू पतलू घर से बाहर आये
ठीक उसी समय उनके घर में क्या हो रहा
था जरा यह भी देखलीजिए।
Motu Patlu Ki Kahani
और जब बाहर सारा हंगामा खत्म
होने के बाद मोटू पतलू घर आये तो
सिवाय दीवारों के कुछ भी नहीं बचा
धाक
बू हू हू हू..लुट गये बरबाद हो गये,हमारा
सब कुछ चोरी चला गया
चोर…चोर..
बूहु हू..जो हो गया सो हो गया अब चोर
चोर तो मत चिल्लाओ कहीं मोहल्ले
वाले दुबारा आ गये तो मेरी बची खुची
हड्डियों को भी सुरमा बन जायेगा बूहहू
Motu Patlu Ki Kahani
बू हू हू…जब से हमारे घर चोरी हुई है।
किस्मत ही पलट गई है अब तो हर तरफ
से धक्के और जूते ही मिलते हैं।
आज हमारे घर चोरी हुई है तो कल किसी
दूसरे के घर में भी हो सकती है।
हां यार हम तो लुटे सो लुटे..कम से कम
बाकी मोहल्ले वालों को तो लुटने से
बचाना चाहिये।
आ जरा झटके के घर चलते है। शायद
वही कोईतिकड़म भिड़ादे।
Motu Patlu Ki Kahani
चल दिये दोनों
पहुंचकर
झटका जी..घर में हो या किसी मरीज को
किया क्रम में गये हुये हो?
आओ बन्दरो, कसे दर्शन दिये..कहो चोर
का कुछ पता चला या नहीं?
‘वो तो अब न जाने कब हाध आयेगा सू बता
हमारी कोई सहयता कर सकता है या नहीं
हमें कोई चौकीदार का पता ही बता दे।
चौकीदार की क्या जरूरत है मेरे पास उससे
भी बढ़िया इंतजाम है।
Motu Patlu Ki Kahani
वो क्या ?
मेरा आविष्कार रोबोट कुत्ता…
अरे वह मशीनी कुत्ता क्या करेगा भला?
हमें तो चोर पकड़ने वाला अविष्कार
चाहिये।
यह रोबेट कुत्ता सब काम कर लेगा पर
| यह मैं तुम्हें नहीं दूंगा..सारे मौहल्ले को
इक्ट्ठा करो,सबकी राय होगी तो ही इसका
प्रयोग करूंगा।
हम अभी जाकर सभी को इक्ट्ठा कर
लाते हैं।
चलोजी
Motu Patlu Ki Kahani
जल्दी ही मोहल्ले के प्रमुख व्यक्तियों की
बैठक हुई
अब तो बोलो मोटू पतलू हम सब को क्यों
इलाया है।
आप.सब तो जानते ही है कि आजकल
चोरियां बहुत हो रही है..सबसे ताजा तो
हमारे घर में ही हुई है।
यह दास्तान हम तुम्हारे मुंह से हजार बार
सुन चुके है..कोई मतलब की बात है तो
बोलो
सुनो तो..हमारी मायापुरी के महानतम
डाक्टर श्री झटका राम जी ने एक रोबोट
कुत्ता बनाया है जो हमारे मोहल्ले की
रखवाली करेगा।
तो मशीनी कुत्ते का क्या करें..असली कुत्ते
क्या पिकनिक मनाने गये हुये हैं।
यात तो तुम्हारी ठीक है पर यह काम कैसे
करेगा?
नही..पर असली कुत्ता हुड्डी के लालच
में चोर को छोड़ सकता है। या सो सकता है
पर यह रोबोट कुत्ता तो न सोयेगा न कुछ
खायेगा…बस चौकीदारी करता रहेगा।
Motu Patlu Ki Kahani
इसका दायां कान दबाने से यह काम
करेगा..पर भूल कर भी कोई इसका बांया
कानन दबाना..
अब इसे स्टार्ट भी तो कर न
झटके ने रोबेट कुत्ते का दांयां कान दबा.
दिया कुत्ता चलने लगा।
टिक टिक।
क्या यह हमारी रक्षा भी कर सकता है।
हाँ तो पाठको .इस तरह रोज रात को बारी
बारीसे कुत्ता सभी मोहल्लेवासियों के घरों
पर पहरा देने लगा।
जी हाँ ..इसमें बहुत ताकत है..यह एक
वार में दीवार तोड़ सकता है।
Motu Patlu Ki Kahani
मगर आज हमारे सुपरहीरो
श्रीमान घसीटा राम के घर की
बारी है।
इसके बायें कान में क्या खास
बात है क्यों न मैं उसे दबा दूँ..
देखू क्या होता है.वैसे भी मुझे
ऐसे कुत्ते दोड़ाने का बीस
साल का तजुबा है।
मगर जनाब..बीस साल के तजुर्बे।
से जैसे ही घसीटे ने कुत्ते का बांया|
कान दबाया वह सुपर रफ्तार से
निकल भागा
पिछली बार तो चोर ने मुझे
पिटवा दिया था। पर अब इस
रोबोट कुत्ते के रहते कोई डर
नहीं।
फिर तो कुत्ता किसी के रोके न रूका..
Motu Patlu Ki Kahani
थोड़ी देर बाद ही..यह क्या.इस कुत्ते को हमने रखवाली के
लिये रखा था या दीवारों में सेंधे बनाने के
लिये..
सारी दीवारो में छेद कर गया ..अब तो चोर
आसानी से चोरी कर सकेंगे गुर
यह सब उन काटूों के बनाये रोबेट कुत्ते
के कारण हुआ है। चलो आओ जरा उन्हें
सबक सिखायें।
जल्दी ही चारों जवानो की खूब अच्छी
तरह से मुरम्मत की गई
ठाधड़ाक मारा हायमरा
खबरदार..जो ऐसाउलजलूलआविष्कार
फिर कभी किया तो
हमारे मकानो की मुरम्मत जल्दी ही करवा
देना वरना हम तुम्हारी इससे भी भयानक
हालत कर देंगे।
Motu Patlu Ki Kahani
मगर यही बात समाप्त हो जाती तो ठीक थी
मोहल्ले वालो ने किसी तरह कुत्ते को
पकड़ा और-
बू हू हू.न जाने यह कहां जाकर
रूकेगा…हाय मेरी पीठ…
रूकेगा तो तभी जब इसकी बैटरी खत्म
होगी तब तक यूं ही घिसटते रहो..हाय..
यह सारा पंगा इस मुच्छड़ तजुर्बो का किया
कराया है, यदि आज किसी तरह जिन्दा
बच गये तो इसे समुन्द्र में फेंक आयेंगें
बोरी में बांध कर.गुर
बू हू हू.मैंने तो सिर्फ जुर्बा करके देखा
था मुझे क्या पता यायह हालत बनेगी
Motu Patlu Ki Kahani
उफ! यह वैशाली फिर पायदान से पांव पौछे
बिना अन्दर आ गई।
सुरिन्द्र रानी जौली!
अभी डांटती हूँ इसे।
जब कि मैंने समझाया भी था कि घर में
मेहमान आये हुये है और यह छोकरीअलग
से काम बढ़ायेदे रही है।
वैशाली! ओवैशाली!!..
मैं इधर हूँ मम्मी।
यह क्या घर में घुसते ही भूख लग
आई-याद है मैंने सवेरे क्या कहा था?
हाँ मम्मी,,आपने कहा था यह मेहमान भी
जब देखो मुंह उठाये चले आते है
कम्बख्त ..अब दिन भर नौकरों की तरह
इनके हुक्म बजा लाओ हंह।
Motu Patlu Ki Kahani
मेगावाजमना
मैं आपका दोस्त घसीटारामहूं “नीचे मोटू के हाथ
में हलवे की भरीप्लेट देखरहे हैं न आप कृप्या
करके मुझे उस तक पहुंचा दीजिए”मैं वादा
करताई कि आधा प्लेट हलवा आपका सच्या
Watch Motu Patlu Ki Kahani
https://www.youtube.com/watch?v=ypMypnIhdnE
PAANI RE PAANI

हाय 555 उधटभीनहीं मिला।
|पानी!कम्बख्तसारे हैंड
पंप भी तो टूटे पड़े है।
अटे पतली अकल, अगट सस्कारीनलों मे यानी
आ रहा होता तोहमें यूक्यों भटकनापड़ता गलियों में ।
यूंइधर-उधर चक्कर मारने से अच्छा है.
घसीटेकेघटचले.उसके घट पानी होगा।
Motu Patlu Ki Kahani

उचर घसीटे का हाल देखें
चलू मोटू पतलू के यहां | शायद पानी आ रहा हो, मुझे | तो नहाए हुए भी कई दिन हो गये हैं अब तो अपने ही बढ़न 00° से बदबू आने लगी है !
जनाब रास्ता एक होतो मुलाकात हो ही जाती है
क्यों बे खाली कनस्तरो, ये सवेरे-सवेरे बालटियां उठाए कहां जा रहे हो ?
हाय| कोई नहाए भी कैसे.. आजकल लो पीने के लिए भी पानी मिलना मुश्किल हो रहा है, तीन दिन से मुँह भी नहीं धोया
मैं तो तुम्हारे पास पानी लेने आया था, लाओ डाल दो एक बाल्टी | इसमें, और ले आना।
अमो यार तजुर्बे हमारे पास पानी कहां से आया, यह देख बालटियां सूरवीपड़ी हैं, हम तो खुद ही तेरे पास पानी लेने जा रहे थे!
Motu Patlu Ki Kahani

मेरा ख्याल है हमें किसी बहंस में न पड़ कर झटके के यहाँ वलना चहिए।
पानी की समस्या की गम्भीरताका अतू इस बात से लगा ले कि इसमे ने पंजे के पानी का कभी फिलास तक नहीं | उठाया, बाल्टी लिए मेरे साथ गलियों की पान रहा है।
मेरा ख्याल है झटके के यहां पानी मिल ही जाना चाहिए।
हो. और इसी बढ़ाने उसके हाल पास भी पूछ लेंगे?
उपट झटका भी परेशान था
न जाने लीचड़ नलों को क्या हो गया है। पानी की एक | बूंद तक नहीं टपकाते।
झटका दरवाजे को ताला लगा पाना उससे पहले ही पानी के प्यासे वहां आ धमके झटके रुक जा हमें थोड़ा पानीले लेने दे। ठा यार हमें पानी भर लेने
दे फिर जहां जाना हो चले जाना।
Motu Patlu Ki Kahani

क्यों बे] सरीजमार, हमें पानी ! लेने आता देखा तो ताला लग दिया दरवाजे पर
चल ओए झटके, खोल दरवाजा हमें पानी भर लेने दे!
फुकनूसो, मेरे पास कौन सी नदी बह रही है मैं तो खुद रेहड़ी वाले से उरू.फी बाल्टी के हिसाब से पानी लाता हूँ वहीं जा रहा था. आ जाओ मेरे साथ |
और चारों यार मिलकर रेहड़ी वाली जगह पर पहुॅचे!
और बढऊयहाँ तो पानी की कोई रेहड़ी नहीं है, सामख्वाह परेड करवा दी
क्यों नाराज होते हो घसीटे आई हो सकता है रेहड़ी वाले को भी आज कहीं से भी पानी न मिला हो।
पानी के प्यासी को जब कही भी पानी नहीं मिला तो सभी कि तभी
लीचड यार वापस ही भुइने वाले थे
अबे कसलो, यहाँ क्या पानी की भा सीक्यू पानी के भतार सांगते फिर रहे हो याटिया उठाए ? दुओको सलता पानी के बिना हमारी हालत वैसे ही खराब है।
Motu Patlu Ki Kahani

मगर इस कम्पाऊंडर के चेले को पानी की क्या कभी किसी को भी इंजेक्शन लगा बदले में पानी की बाल्टी
मांग
मुझे लगता है नीचड़, तुझे कहीं से (अंढ़ी | नाली पानी मिल गया है तभी इतना उपन रहा है हमारी तरह पानी के लिए भटक रहा होता तो पता चलता।
भूए, उसके लिए भी तो पानी चाहिए।
कहा यारो, पानी के लिए तो समझो कल मैं बच गया जूते खाते
है, बच गया भला वो कैसे?
कल रात में पड़ोसी की पानी कीटकी से एक बाल्टी पानी निकालने के लिए पन पर चढ़ा तो देसा पड़ोसी छत पर ही बैठा था. हाय बड़ी मुश्किल से बच पाया कल
अबे तेरे साथ इतना कुछ हो गया अगर फिर भी तू सुरा है।
बादल वाला है यार तू तो
अरे चिचड़ों खुश तो मैं इसलिए तू कि मैले पानी की इस समस्या का उपाय ढूंढ निकाला है जिससे हमारी वष्टियों तो क्या घर में भी पानी की बाद सी आ जाएगा।
Motu Patlu Ki Kahani

हो है उपाय देखे नगर निगम वाले थोड़प छोड़ते है वह छ मोगसीच लेते हैं जिनके घरों में मोटर पम्प लगे हैं।
उपाय है कि हम पड़ोसियों के परा में लगी मोटरों से शक्तिशाली मोटर पम्प लगवा लें.
बात तो तेरी ठीक है, मगर उपाय क्या है?
अब, तुझे हमारी जेयों की इसका ही तो उपाय है मेरे पास हालत का पता ही है कहां से लाएंगे मोटर पम्प ?
तो बोल जल्दी
मेरा यार रिंकू इन दिनों मोटर पम्प किराये पर देने का कर रहा है, | उसे से ले उपएंगे किराये पर दोनों चीजें
वाकई उपाय उच्चकोटीका था यारों को पसंद क्य
न आता भला।
अच्छा किराया क्या लेता है तेरा के यार?
सिर्फ 25 रु. हफ्ता ! 25 रुदो हफ्ते अरसे बेशक अपने घर को बना तैराकी करो. नाव चलाओ!
वाह तेरा उपाय बढ़िया भी है, सर्चीला भी नहीं
तो आओ चलें
Motu Patlu Ki Kahani

और फिर जनाब सारे यारों ने मिलकर पैसे इक्ट्ठे किये और ले आए मोटर पम्प सेंट… आईय देखें तो कैसे आता है पानी नल में इस सैट से
धामड़ो में बटन दबा रहा ६. घर के सारे बर्तन अमा कर लो
सब में पानी भर लेंगे
हो गए, पम्प सेंट अ चल गया लेकिन
जी जनाब वक्त तो लगा अगर पानी आ गया।
अपलो आया नहीं?
हुरैरेऽऽऽ आ गया रेपानी १९९…
हावतो लगेगलयारा
पाजी आयारे हरे पहले में भरूगा पानी
Motu Patlu Ki Kahani

पानी की किल्लत सिर्फ इन्हें ही नहीं और लोगों को भी थी. “आ गया रे पानी के शोर ने
● उन्हें किस कदर आकर्षित किया, उसका अंजाम तो आप देख ही रहे हैं!
हट जाओ सारे पीछे पहले मैं भरूंगा।
अरे यारों कोई हिम्मत करके उस पाईप को उठा लाओ दोबाल्टी पानी भरले मोटर लगाने का कुछ फायदा तो हो है कि इनके बीच नहीं फसे इससे पहले कि बात और बड़े भागलो यहां से।
Motu Patlu Ki Kahani

क्या बात है मोटू, आज उठना नहीं है ?
नहीं, कल सारी रात सपने में जागता
रहा दसलिए नींद आ रही है सोने दे मत कर
Motu Patlu Ki Kahani

भेटू के बच्चे, झगर आज मै आर-तेरा
भुर्ता न बना दिया तो मेला भी ल
आटो,नहीं SSS…
Motu Patlu Ki Kahani

ओ मोठे कुकड़-ब्ज हालतू मोहीन या नहीं….
जब तू पांच चिल्लाता हुआ खुदा हुआ है.
अब क्या बताई, पीले जब भीजा हरी आँख लगती है एक धुंधकर सपना दिखता है और में हड़बड़ा कर उठ बैठता
पिता तो दाले मुझे अपने विता या
क्या कहूं. एक आदमी अपने दोनो रहा है. बडी बुरी तरह आता है वो
ओह! तो यह बात है ओलू -बार भैंसे की तरह लाकर उठ पड़ता है
ऐसे सपने आभा अच्छी बात नहीं है मोटारे क्यों कि कभी-कभी ऐसे सपने सच भी हो जाया करते है
Motu Patlu Ki Kahani

सीकहा सभी
भी लेटे अकेले आते हुये मुझे डर लुता स.
आजा फिर.
ठीक है पर अ ती आधी रात ही सुज़ी है बाकी रात जैसे गुजारे?
तुझे माल आण एक ही ईलाज है कि तू
बाकी होत
क्यौज हम ऐसा कहें कि बाकी रात गुजारने के लिये हम अपने यादों के पास चले उससे मात करके नींद भी नहीं आयेगी और रात श्री गुह जायेगी.
आधी ट्रात को हमारे जवान चल पड़े यारों के घर.

लेकिन आधी रात को चंबु-अंबु यहो छिपे क्या कर रहे हैं?
उद, वो सामने से दोचले आ रहे है. आज इन्ट्री को कंगला करके अपनी बोहली करते है.”
और जैसे ही दोनों पास आये
खबरदार, होशियार. हमारे हाथ में है हथियार, जो कुछ जेब में है निकाल करो बाहर
बरना चाकू होगा अन्दर और दम होगा पोट बन्दर
सारा हिन्दोस्तान हमें मोटू पतलू कंगलायार से जानता है.. कसम से..
नजाने आईने में किसका मुंह देखा था.. पहला शिकार मिला वो भी
उस्ताद कुछ करो, अगर बोहनी ख हो गई तो सारी रात बेकार चली जायेगी.
आजाने दे फिर इन्हें.
म. म. अगर भैय तो फूटी कोड़ी भी नहीं है. कंगले है हम तो.
ऐसा क्या? चलो भई- चुपचाप अपने कपड़े उतार कर रख दो और फूट लो यहां से.
Motu Patlu Ki Kahani

आ रही है जैसे धे के हो.. से आ
शुक्र है व्रत को लुटे.. दिनको लो
पूरे इलाके में जलू निकल जाना धा.
बेकार ही घर से निकले..
जो होना था हो जया यस अ यूलि के पास तो चलें. पहुंचकर
यहां तो दोनो अधे बेचकर सोये लगते हैं? आधी रात को वो होये
ओये बेसुरे सानपुरे, नहीं होने तो क्या सड़कों पर डालते मिलेगे
Motu Patlu Ki Kahani

अच्छा-अच्या. अब उन्हें जगा भी आये रात यहां सड़क पर काटने का ईलदा है क्या?
यह बजाई मैने घण्टी.
मगर
अयं ! घण्टी की आवाज से तो अपने थाट उठ ही नहीं रहे?
品
इस तरह जागने भी नहीं क्योंकि अब अपने घाट पीते हैं तो पुस्कर को भी मात करके
हां, यह ठीक रहेगा. इस सरह तो उनके फरिटते भी जनकर बाहर आयेंगे.
तो अज क्या करें?
करना क्या है हाथ-पैर दे करके तैयार होजा और लगआ पीटने
फिर क्या था, हो गये दोनों
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घसीटे दरवाना खोलं.
झटके ओass
गुर्र आधीरात को कोट मचा-अचाकर मौहल्ला सर पर उग रखा है
इतने जुते लगा कि सपने में भी नहीं चिल्लायेगे
धाड़. डाळ हाय मर गये और लो.
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अभी अच्छी तरह पीटकर चले गये लो यह आवाजें कैसी थी? और यह तुम्हें क्या हुआ?
अब बाहर निकले हो कम्बदन्तो. पहले कहां थे जब लोग हुवें जूते लगा थेहूहू…
तेरा सपना सच हो गया टू कहां सपने में पिटने से बचने यहां आये थे और कहां सूच मुछ ही पिट गये
एक राज की बात में आपको बताउं पाठको, दरअसल हुन इनकी पहली आवाज पर ही जान गये थे मगर हमने दरवाजा इसलिये नही खोला क्योंकि हम चाहते थे कि हमें आधी रात को डिस्टर्ब करने
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यार जैसे, ये मोहल्ले वाले स्वमस्ववाह हमारी धुजाई कर गये हम तो १० दशक की टीम के लिए एथलेटिक्स की खुली स्पट्टी के लिए प्रेक्टिस कर रहे थे फेंकने वाली म
ये मार नहीं गये बल्कि पिटने की प्रैक्टिस कस अये है, ताकि एक्लेटिक्स की ही तरह अगर कभी जूते खाने की खुली स्पट्टी हो तो हमें उसके लिए इस तरह प्रैक्टिस करने की जरूरत न पड़े।
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मे भाई मोटे गैरो र आया में इंटरी फार्म एथलेटिक्स की खुली एपढ़ी के लिए, अब हमें प्रेक्टिस शुरू कर देना चाहिए।
मगर तिनके फलदो दिन हो जाएंगे इस सुली स्पर्दा में भाग लेने के लिए प्रेक्टिस किये हुये।
मगर इतनी प्रैक्टिस से काम नहीं चलेगा गेडे..
काम क्यों नहीं चलेगा सीखचे?
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ये इसलिए मोटे कि इस सुली स्पर्धा में ने देश के कोने-कोने से जाने-माने दिग्गज भी आयेंगे !
-इस खुली स्पट्टी में पहला या दूसरा स्थन जरूर हासिल करना है कुछ भी हो जाए!
और हम हमसे में जेल में तुम वे ही हो
ही यार जन्नती हूँ…मगर
ठाँ। और इसके लिये होगी कड़ी मेहनत की जरूरत
अमिर इन्डी प्रतियोगियों में से ही तो चुनी जयेकी ७० दशक की एनेटिक टीम
और हां मुल्ले एक बात पताल में भूल गया स्टेडियम से अपने तीनों लीचड़यार भी मिले थे, उन्होंने भी फार्म भरेड
वय उन लीचड़ों लेभी
देख लेना।
-तबसे हो गबेड़ा गर्क समझ, उन चिवडो ने कोईल पंगा डालना ही है
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ओए नहीजेत सकते
तोहसे कैलेंज कर रहा था कि हम कसमे नहीीत सकते।
उसकी बातों से निराश मत होता हम उन्हें जीतकर दिययेंगे !
बैंक है।
हो यार! आने तो चाहिए-
लेकिन आएंगे कड़ो से न तो हमारी किसी प्रथ से आज पहचान है. अगर कोई पैसे लेकर सिख टेल
यार, तर ने बतबल मई समझ नह की टीम से हो जायेंगे।
स?
रमेसे, हर खेल के कुछ लियम और तरीके भी आहए हमे |
दहमारे धर्मभइया के एथलेटिक्न के बड़े अच्छे कोच है अच्छे से उनसे पने आते है।
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तब से वह देर न कर धर्मवीर भईया सेस्किर उन्हें कोचिंग के लिये बनते है!
नमस्कार धर्मवीर भईया !
और फिर
अरे ये नमूने आज इधर कैसे अन पहुंचे अवयनवाये।
भाई साहब, आपको पता ही से आने वाले दिनों में स्थलेटिक्स की स्पर्धा होने वाले है जिसमें कोई ले सकता है
मजूम है अनेकहो ।
हमने स्पर्धा के फार्म भरे है. अब हम दोनो कोयस!
क्या तुम दोनों ने उस स्वीक लिए फार्म भरे हैं !
ओये जब यहां तक आने में ही तुम्हारी सांस फूल गई है तो स्पर्ला में तुम्हारा तुम इसला नहीं हो।
यो हैजाकर
हमने किसी प्रतियोगिता में आस नहीं भे लिया तो क्या कई बार हमने भासकर अपने को बचाया है पिटने से यह बात सभी जनते हैं।
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और हम कल से प्रेक्टिस भी शुरू कर दी है जब को जे पे सुहागे का काम करेगी….
अमओ नमूनो!
कम से प्रेक्टिस शुरू की है फिर लोलुमफिट हो ही नहीं सकते स्पर्दा के लिए मैं तुम लोगों का कोच बनकर बेइज्जत नहीं होना चहता!
मगष्टकोच जी..
हो.जी. कोच जी, अपठीक कह रहे हैं. इनसे ज्यादा फिर से हम है परों से प्रेक्टिस शुरू की हुई है।
ओर बिचड़, फिट- फिट की बहस छोरे मामले में ज्यादा टोम उड़ाई अभी बता दू तू कितने पानी में है।
गरेरणा वहां भी अपहुंचे राजस
लामलों से सिर्फ हमें ही कोजी, आप यही रहना, आपको देंगे समक्षा |
अभी पता चल जायेगा।
कौल फिट है!
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बढ़ाओ, बंद करो ये उठा पटक मैं तुम्हारा कोच बनने को तैयार है।
लेकिन तुम्हें शहर का पूरा कर लय के सिद्ध करना होगा कि तुम फिट हो मंजूर?
मंजूर है जी।
उस फाटक के पास जो फिजिश लाइन है, में वहां मिलूंगा तुम्हें अब जाओ एक दो तीन स्टार्ट !
कुछ दूर आकर
मेरे तजुर्वे से इधर से चलो अल्ट्री पहुंच राग जायेंगे छोटा रास्ता है।
इनको साथ दौड़ाने के लिये तजुबे से बढ़कर आ गया कोई
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मेर सुरेर खराब कर दिया
इस बजते हुए नमें से है।
पते।
जज हम ती इस रास्ते से कपड़ो पड़ो का स्व
जैसे ही आगे ब
तातो यह बात है उधर दनाकर यू बाहर से भाग रहे हैं. हम अज अपन हिसाब पूरी तरह बराबर करके
कैसे छोड़ हरे राय
अभी गये शहर क्र अनही ते ही ही गए होगे।
या ये सपॉर येतो लगभग ही है।
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के तकन
उससे होइतनी हिम्मत नहीं
FINISH
की अब टि है खुसी स्पट्टी के लिए आप हमे दे रहे?
अभी से हं, अगर तुम रोज इसी प्रकार प्रैक्टिस करते रही तो अभी स्पर्धा में सायक हो जाओगे फिल में तुम्हें कोपिंग भी अच्छा लिए
और कोच जी अक्षर यह सबकुछ कहा था तो पहले ही कह देते यह दुर्गतील होती ज आईबहू 355 हायरी
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